प्रोफेसर की जंगल में चुदाई

मैं महेश शिन्दे हूँ और पेशे से एक कौलेज मेँ प्रोफेसर हूँ. आपको सुनाऊंगा आज मैँ एक ऐसी सेक्सी कहानी, जिसे सुनते ही आप मूठ मारने लग जायेंगे. हमारे कौलेज मेँ हम लोगोँ के साथ एक वाहिदा नाम की प्रोफेसर भी पढ़ाती थी, वो एक ब्याहता स्त्री थी लेकिन उसका शौहर किसी दूसरे देश में नौकरी करता था और कभी कभी फोन कर लेता था वहाँ से. उसकी तगडे चूतड की बातेँ सिर्फ प्रोफेसरोँ में ही नहीं, कौलेज के लौंडोँ में भी बडे शौक से मशहूर थी, वाहिदा देखने में बन थी बन… गज़ब की सेक्सी लगती थी वो, उसके बडी बडी चूची अक्सर उसके ब्लाउज में से निकलने को मचलते रहते थे, रंग उसका ज़रा दबा हुआ था लेकिन उसके चेचरे की बनावट इतनी कातिलाना थे कि देखते ही पैंट में लंड कुश्ती करने लगता था. हर प्रोफेसर और यहाँ तक कि बड़ी क्लास के लौडे लोग भी एक ही बात सोचते थे कि कैसे उसे पेला जाये. वैसे भी वो कोई सती सावित्री नहीं थी, कौलेज के ट्रस्टी के साथ हमेशा वो देर रात तक उसके घर में रुका करती थी और यह भी सुना था कि वो तो उसके साथ दूसरे शहर में भी कई कई हफ्तोँ तक लंड खाने चली जाती थी.

ठंडियोँ के दिनोँ मेँ हमें स्टूडेंट्स के साथ पिकनिक का कैंप लगाने के और्डर मिले तो हम सभी ने मिल जुल कर यह तय किया कि पहाडोँ मेँ एक जंगल है जो कि यहाँ से दो सौ मील की दूरी पर है वहाँ पर कैंप लगाया जाए. चार दिन के कैम्प की बात फिक्स हुई. सभी स्टूडेंट्स का वहाँ जाना ज़रुरी था. अगले सुबह हम सभी प्रोफेसर और स्टूडेंट्स एक बस में बैठ कर निकल पडे. वाहिदा ने जिस्म से कसी हुई जींस और डीप लो कट का सेक्सी टॉप पहना था. पहाडोँ मँ रात मेँ बहुत ठंड थी, सभी को ज़्यादा ही सर्दी लग रही थी, तभी मैँने जेब से एक बोतल वोडका की निकाली और एक पेग मार लिया. फिर मैंने मन ही मन निश्चय किया कि आज वाहिदा पर हाथ आजमाया जाए. यही सोच कर मैं वाहिदा के तम्बू की ओर आया मुझे. वाहिदा के टेंट में तेज़ हलचल दिखाई दी. मैंने देखा कि वाहिदा अपने कपड़े बदल रही थी. उसने अपना टॉप उतारा फिर ब्रा उतारी. तभी वाहिदा ने अपने सारे कपड़े एक एक करके निकालने लगी और पूरी नंगी हो गयी और फिर उसने कपडे पहन लिये. मैं वाहिदा के तम्बू में घुसा और देखा कि वो नाईटी पहने हुए अल्सा रही है. वो कोई सेक्सी किताब मेँ मशगूल थी और उसकी झांघेँ साफ साफ नज़र आ रहे थे. लो नाईटी पहनने के वजह से उसकी मोटी मोटी चूची एक साईड मेँ झूल रहे थे. मुझे देखते ही वो चौंक कर बैठ गयी और इसी बीच उसकी चूची हिलने लगी जिससे मेरे लंड ने सलाम कर दिया.

मैं उसकी चूची देखने की कोशिश में लगा था और बार बार उसके नाईटी में झांक रहा था. उसका ध्यान भी इस तरफ चला गया और वो अदा से हंसते हुए बोली- शिन्दे जी क्या बात है …? आपकी तबीयत कुछ ठीक नहीँ लग रही है हाँ…? मैँ भी बोल पड़ा- अरे जान, तुम माल ही हो फटाक.. समझी. मेरी बात सुन कर मुस्कुराने लगी तो मेरा हौसला बढ़ गया. फिर तो मैंने भी अपना हाथ उसके हाथ पर छू कर रख दिया.

वो मेरे और करीब आ गई, उसकी आँखें बन्द होने लगीं. मैँ भी आगे बढा और उसकी तरफ सरकते हुए मेरे होंठ उसके लिप्स की तरफ बढ़ाया. उसने कुछ कहा नहीँ और मैं भी आगे बढा. फिर उसके ज्यूसी लिप्स को मैंने अपने दोनों लिप्स में ले कर सक किया और किस करना चालू कर दिया. उसके दोनों बाहेँ भी मेरी कन्धे पर घेरा बना चुके थे अब तक. तभी मेरे दोनोँ हाथ मैँने भी उसके नाईटी मेँ डाल दिये ताकि वो उन पपीतोँ को महसूस कर सके. उसके मोटी मोटी तगडी चूची अब मेरी ग्रिफत में आ गयी और मैं उसके दोनोँ लिप्स को सक हुए उसके निप्पल को चुभला रहा था. मेरा हाथ एक बार निप्पल को छूते और फिर तो उसकी चूची को दबा और सहलाता जाता. धीरे से मैँने उसकी मखमली नाईटी को उठाया और उसकी रस्सी खोल दिया जिससे उसकी चूची तपाक से बाहर निकाल आई. एक निप्पल को मैंने मुँह में लेकर चूसा तो वाहिदा “आ हह.” ऐसे बोलने लगी. जोश आ गया था मुझे भी. एक हाथ उसकी दोनों टांगों के बीच में ले जाकर मैंने उसकी चूत का मुआयना लगाया. चूत नहीँ वो तो मखमली का टेड्डी बीयर थी. चिकनी मुलायम बिल्कुल. इतनी रसीली और मस्त. ब्रेड की तरह सूजी हुई. मैंने उसे अच्छे से चुभलाते उसकी चूत के दरार में अपनी एक ऊँगली फिराने लगा.

“औउह्ह्ह्हूओ..च ईईआह्ह्ह. ..” वाहिदा के मुँह से आवाज़ निकल पड़ी.. मैंने निप्पल को चूसना छोड़ कर फिर से उसके लिप्स पर मेरे लिप्स टिका दिए और अपनी ऊंगली उसकी चूत से हटा दिया और फिर मैँने उसकी निप्पल को मसलने लगा. मेरे पैंट की ओर वाहिदा का हाथ आने लग गया. मेरे सख्त लंड को वो पैंट पर से ही मसलने लगी. मैंने ज़रा सा उठकर अपनी पैंट खिसकाने में लग गया और फिर वो भी तुरंत हाथ आगे बढा कर मेरे पैंट को निकालने मेँ मेरी मदद करने लगी और फिर मेरे अंडरवीयर को जल्दी से नीचे सरका दी. मेरा मूसल बमपिलाट लंड उसके सामने हिलने लगा था, तब उसने अपनी नाईटी को धीरे धीरे मुझे तडपाते हुए नीचे उतारा और मेरे लंड के अगले भाग को आगे उसकी चूत पर टिका दिया, फिर तो मैंने उसकी मस्त गोल गोल चूची सक कर कर के लाल कर दिया. जब मैँने उसकी चूत के दाने पर अपने लंड के मोटे अगले हिस्से को रगडा, तो वो सिसियाने लगी और मेरे अपनी चूत को मेरे लंड पर धकेलने लगी. उसे इस तरह से सताने मेँ मुझे बहुत आनन्द मिल रहा था . लंड का घिसना जारी रखा मैँने उसकी चूत पर इसी तरह से.

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और बस इसी ताक मेँ मैँने एक जोरदार धक्का मारा. मेरे लंड के दमदार घक्के को खा कर वो मस्त हो उठी और मुझे कस कर पकड ली. उसके बाद मैँने धीरे धीरे एक एक करके कई धक्के लगाये और वो हर धक्के पर अपने गांड को नीचे से धकेलने लगी और मुँह से अजीब अजीब आवाज़ भी निकाल्ने लगी. मुझे लगा इससे ज़्यादा चुदाई औरत तो मैँने आज तक नहीँ देखा है.

चोदते हुए बीच बीच मेँ मैँ उसे किस करता और उसे काटता भी गया और वो भी मेरे हर किस का जवाब अपने किस से देती और मुझे भी काटती और सिसियाती. बडा ही रोचक नज़ारा बन गया था वहाँ. उसकी और मेरी वासना अपने चरम पर पहुंच रही थी लेकिन कोई भी हार मानने को राजी नहीँ था. अचानक से उसने मेरी जीभ को लौलीपौप की तरह अपने लिप्स में जकड लिया और सक करने लगी. मैँने जब फिर उसकी दाईँ चूची को दबाया तो वो चिल्ला पडी … बेबीए आअ .. ज़रा स्लो करो ना.. मार ही दोगे आज लगत है जानू. उसने मेरी जीभ को सक करना छोड़ कर कामुकता से बोली तो मैंने उसकी चूची को हल्के हल्के घिसना चालू कर दिया. फिर उसने भी अपनी टंग बाहर निकली और हम दोनोँ ही अपने टंग को रगड़ने लगी.. उसने बड़े सेक्सी तरीके से मुझे देखते हुए कामुक नज़रोँ से मेरी थूक को चाटना शुरु कर दिया.. नीचे मेरा लंड उसकी चूत का कीमा बनाने में लगा हुआ था. उसकी चूत फिर भी मेरे हर धक्के का मजबूती से जवाब दे रही थी. दोनोँ के लंड और चूत पूरी ऊर्जा से सराबोर हो गये थे.

फिर तभी मुझे अहसास हुआ कि मेरा पानी निकलने मेँ देर नहीँ है. मैं लंड से उसे चोदता रहा उस समय और मैंने उसकी चूत को चोदते हुए उससे पूछा- वाहिदा.. बेबी.. मेरा लंड कभी भी ब्लास्ट कर सकता है… अन्दर डालूँ अपने पानी क या फिर बाहर आ जाऊं? वाहिदा ने मुझे जोर से चिपका लिया और बोली- आह..अन्दर ही डाल दो ऊह..आह….मेरे अन्दर तक भीगो दो… आह..आ..आ.ओह्ह…गीला कर दो अपने रस से.. मेरी चूत को.. आ.. आह.. अहह.. मैंने जब यह सुना तो फिर मैँने उसे चोदना चालू रखा- चूस जा तू मेरी रांड मेरे ज्यूस को आज… …” मैंने बोला वो भी नीचे से चिलाई अरे हाँ..जल्दी जदी… ई…ऊऊ… ब्ब.ब…म्म्म्म… ..आऐइइइ…. … …खा जाओ मुझे चोदूऊ सल्ल्ल्ली मादर्र्र्र्र्छ्हूद्द्द….व.. मैँने लंड की धार चूड दिया और फिर वो भी चूत के रस को बाहर निकाल दी.. छोड़ी और इस तरह हमारी सेक्सी कहानी का अंत लंड और चूत का मिलन जंगल मेँ हुआ.

This Post Has 2 Comments

  1. Garm Dudh

    Chut jo mil jaay to jungle me bhi mangal ho jaay

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